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Thursday, 4 February 2016

गौतम बुद्ध के राजा को उपदेश देने की घटना

मै एक अछूत कन्या हूँ।
 मेरे कुएं से पानी निकालने पर जल दूषित हो जायेगा।
एक बार वैशाली के बाहर जाते धम्म प्रचार के लिए जाते हुए गौतम बुद्ध ने देखा कि कुछ सैनिक तेजी से भागती हुयी एक लड़की का पीछा कर रहे हैं। वह डरी हुई लड़की एक कुएं के पास जाकर खड़ी हो गई। वह हांफ रही थी और प्यासी भी थी। बुद्ध ने उस बालिका को अपने पास बुलाया और कहा कि वह उनके लिए कुएं से पानी निकाले, स्वयं भी पिए और उन्हें भी पिलाये। इतनी देर में सैनिक भी वहां पहुँच गये। बुद्ध ने उन सैनिकों को हाथ के संकेत से रुकने को कहा। उनकी बात पर वह कन्या कुछ झेंपती हुई बोली ‘महाराज! मै एक अछूत कन्या हूँ। मेरे कुएं से पानी निकालने पर जल दूषित हो जायेगा।’बुद्ध ने उस से फिर कहा ‘पुत्री, बहुत जोर की प्यास लगी है, पहले तुम पानी पिलाओ। इतने में वैशाली नरेश भी वहां आ पहुंचे। उन्हें बुद्ध को नमन किया और सोने के बर्तन में केवड़े और गुलाब का सुगन्धित पानी पानी पेश किया।
 बुद्ध ने उसे लेने से इंकार कर दिया।
  बुद्ध ने एक बार फिर बालिका से अपनी बात कही। इस बार बालिका नेसाहस बटोरकर कुएं से पानी निकल कर स्वयं भी पिया और गौतम बुद्ध को भी पिलाया। पानी पीने के बाद बुद्ध ने बालिकासे भय का कारण पूछा। कन्या ने बताया मुझे संयोग से राजा के दरबार में गाने का अवसर मिला था। राजा ने मेरा गीत सुन मुझे अपने गले की माला पुरस्कार में दी। लेकिन उन्हें किसी ने बताया कि मै अछूत कन्या हूँ। यह जानते ही उन्होंने अपने सिपाहियों को मुझे कैद खाने में डाल देने का आदेश दिया। मै किसी तरह उनसे बचकर यहाँ तक पहुंची थी। 
 
इस पर बुद्ध ने कहा, सुनो राजन! 
यह कन्या अछूत नहीं है, आप अछूत हैं। जिस बालिका के मधुर कंठ से निकले गीत का आपने आनंद उठाया, उसे पुरस्कार दिया, वह अछूत हो ही नहीं सकती।
 
 गौतम बुद्ध के सामने वह राजा लज्जित ही हो सकते थे।  देने

Friday, 27 November 2015

बाबा साहब की 22 महाप्रतिज्ञा



  • मैं ब्रह्मा, विष्णु, महेश को कभी ईश्वर नही मानूंगा.ना उनकी उपासना करूँगा.
  • मैं राम और कृष्ण को कभी ईश्वर नही मानूंगा और ना ही उनकी उपासना करूँगा.
  • मैं गौरी, गणपति, इत्यादि हिन्दू धर्म के किसी भी देवता को नही मानूंगा और ना उनकी उपासना करूँगा.
  • ईश्वर ने कभी अवतार धारण किया है इस पर मेरा विश्वास नही है.
  • बुद्ध विष्णु का अवतार हैं ये झूठा और शरारती प्रचार है.
  • मैं श्राद्ध पक्ष नही करूँगा और ना ही कभी पिंडदान करूँगा.
  • मैं बौद्ध धम्म के विरूद्ध ऐसा कोई भी आचरण नही करूंगा.
  • मैं कोई भी क्रिया कर्म ब्राह्मणों के हाथ से नही करवाऊंगा.
  • सभी मनुष्य मात्र समान है ऐसा मे मानता हूँ.
  • मैं समता स्थापित करने का प्रयास करूँगा.
  • मैं तथागत गौतम बुद्ध के बताये हुए अष्टांग मार्ग का पूर्ण पालन करूँगा.
  • मैं तथागत बुद्ध के बताई दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करूंगा.
  • मैं सभी प्राणी मात्र पर दया करूँगा और उनका लालन पालन करूँगा.
  • मैं चोरी नही करूँगा.
  • मैं व्याभिचार नही करूंगा.
  • मैं झूठ नही बोलूँगा.
  • मैं शराब मदिरा आदि का सेवन नही करूंगा.
  • प्रज्ञा,शील, करुणा धम्म के इन तीन तत्वों का मेल करके मे जीवन व्यतीत करूँगा.मेरे पुराने मनुष्य मात्र के उत्कर्ष में हानिकारक होने वाले और मनुष्य मात्र को असमान और नीच मानने वाले हिन्दू धर्म को त्याग करता हूँ और बुद्ध धम्म स्वीकार करता हूँ.
  • बुद्ध धम्म सध्म्म है इसका मुझे यकीन हुआ है और रहेगा.
  • आज मेरा नया जन्म हुआ है ऐसा मे मानता हूँ.
  • इसके बाद मे बुद्ध की शिक्षा के अनुसार आचरण करूँगा ऐसी प्रतिज्ञा करता हूँ.

बुद्ध प्रभात 🌺🌻🌻जय भीम !! जय भारत !!!..

Tuesday, 27 October 2015

तथागत बुद्धा की कृपा ब्राह्मण पर

एक समय भगवान बुद्ध श्रावस्ती में मिगारमाता के पुष्वाराम मे विहार कर रहे थे ।
 धम्म सीखने और सुनने के लिये मोग्गालन नामक ब्राहमण लेखाकार भी अकसर आता रहता था ।

 एक दिन वह जल्दी आ गया और भगवान को अकेले पाकर बोला कि उसके मन मे अकसर यह प्रशन उठता है कि भगवान के पास जो लोग आते हैं उनमे से कुछ परम ज्ञान को उपलब्ध होते हैं लेकिन कुछ लोग जो नजदीक होते हुये भी इस सुख की प्राप्ति नही कर पाते हैं ।
 तो भगवन , आप जैसा अदभुद शिक्षक और पथपदर्शक होते हुये भी कुछ को निर्वाण सुख प्राप्त होता है और कुछ को नही ? तो भगवन , आप करुणा से ही आप सबको निर्वाण सुख दे कर भवसागर से मुक्ति क्यों नही प्रदान कर देते ।

बुद्ध ने मोग्गालन से पूछा , ” ब्राहमण , मै तुमको इस प्रशन का उत्तर दूगाँ , लेकिन पहले तुमको जैसा लगे इस प्रशन का उत्तर दो । ब्राहमण , “यह बताओ कि क्या तुम राजगृह आने – जाने का मार्ग अच्छी तरह से जानते हो ? ”

मोग्गालन मे कहा , ” गौतम ! मै निशचय ही राजगृह का आने – जाने का मार्ग अच्छी तरह से जानता हूँ । ”

” जब कोई एक आदमी आता है और राजगृह का मार्ग पूछता है लेकिन उसे छोड्कर वह अलग मार्ग पकड लेता है , वह पूर्व की बजाय पशिचम मे चल देता है ।

तब एक दूसरा आदमी आता है और वह भी रास्ता पूछता है और तुम उसे उसे भी ठीक ठाक वैसे ही रास्ता बताते हो जैसा पहले क बता था और वह भी तुम्हारे बताये रास्ते पर चलता है औए सकुशल राजगृह पहुँच जाता है ”
ब्राहमण बोला , ” तो मै क्या करुँ , मेरा काम रास्ता बता देना है । ” 

भगवान बुद्ध बोले , ” तो ब्राहमण , मै भी क्या करुँ , तथागत का काम भी केवल मार्ग बताना होता है । ”

Thursday, 17 September 2015

बुद्धा की महिमा

लोगों का ये कहना है जो अपने को आर्ट्स पढकर वैज्ञानिक बातों को मानने से मना ही नहीं करते बल्कि दावा करते हैं कि जातक कथा बकवास हैं और भगवान बुद्ध के बत्तीस महापुरुष लक्षण बकवास हैं ।

देखिये इस स्त्री की जीभ कितनी लंबी है और भगवान बुद्ध की जीभ इतनी लंबी थी की वे अपने ही कान जीभ से छू लेते थे,
  इससे भी ज्यादा महापुरुष लक्षण से बढ़कर बुद्ध होने के बाद उनकी जिह्वा संसार के सभी प्राणियों से लंबी थी
 यह भगवान ने पौस्कर सात्ति ब्राह्मण को प्रगट की थी की वह जब 31 वां महापुरुष लक्षण ढूंढ रहा रहा तो भगवान बुद्ध ने चेतोपरिय ज्ञान  ऋद्धि से उसके मन की बात जानकर अपनी जिह्वा से अपने सोत्तों यानि कानों को स्पर्श किया और उससे भी बढ़कर अपने पूरे ललाट यानि चेहरे को कान तक अपनी जिह्वा से ढक लिया तो पौस्करसात्ति भगवान बुद्ध के चरणों में गिर कर अश्रु बहाने लगा
और उनका शिष्यत्व मांगने लगा ।

भगवान बुद्ध ने कृपा की ।।
और वो ब्रह्म लोक गामी हुए ।।